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Saturday, 3 August 2013

प्रेम के कोई और मायने हैं क्या



" प्रेम ही जीवन की अंतिम उपलब्द्धि है और अंतिम तक इंतजार ही प्रेम की पराकाष्ठा। प्रेम के कोई और मायने हैं क्या ? "
                और तुमने मेरी हथेलिओं पर अपने होंठो से प्रेम लिखकर कहा " प्रेम में होकर भी कितना अर्थविहीन प्रश्न पूंछती हो। प्रेम की पराकाष्ठा इंतज़ार में नहीं, बल्कि प्रिय के न होने में भी होने को महसूस करने में है। " फिर तुमने उस रात गली के मुहाने पर क्षितिज से एक तारा तोडा और मेरी नाभि पर रखकर मुझसे प्रेम करने की अनुमति मांगी थी।

" प्रेम में अनुमति मांगकर क्यों प्रेम को कर्ज़दार कर रहे हो " फिर आँखों को मूँद लेना ही मेरी स्वीकृति थी और सहमति भी। रोशनी हमारे प्रेम पर लांछन न लगा दे, ये सोचकर बादलों ने चाँद की आँखों को ढक दिया। आहा ! प्रेम का सौंदर्य कितना अप्रतिम है ...'रूप का आभूषण और जीवन का श्रृंगार'। मेरे आभूषण कितने बनावटी लगने लगे थे। फिर मैंने अपनी रूह को तुम्हारे सुपुर्द कर दिया और तुमने मुझ पर से रहस्य की सब परतों को हटा दिया और मेरी देह शर्म के पर्दों से झांकती हुई कमल की एक- एक पंखुड़ी की तरह खुलने लगी। उस रात हमने प्रेम के शिखर पर पहुचकर प्रेममय होने के मायने जाने थे और प्रेम के मायनों में ही हमने जीवन के अर्थ तलाश लिए थे।

कहते हैं, जीवन का अंतिम सच मौत है, परन्तु प्रेम के शिखर पर पहुंचकर ये मलाल भी जाता रहा। तुमने सच कहा था कि प्रेम की पराकाष्ठा इंतज़ार में नहीं, बल्कि प्रिय के न होने में भी होने को महसूस करने में है। तुम्हारे न होने में भी तुम्हारा होना जान लिया है मैंने। प्रेम ही जीवन का अंतिम सच है। सचमुच, प्रेम के कोई और मायने नहीं हैं ....

5 comments:

दिगम्बर नासवा said...

प्रेम की पराकाष्ट प्रेम के होने को महसूस करने में है ... जब प्रेम है तो फिर सब कुछ बस प्रेम मय ही हो जाता है ... जुदाई भी करीबियां लाती है ...

abhi said...

प्रेम ही जीवन का अंतिम सच है।

bahut sach kaha hai aapne!

मदन मोहन सक्सेना said...

बेहतरीन .सुन्दर अभिव्यक्ति.हार्दिक बधाईयां.रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाएं .

Animesh Mishra said...

सच तो ये है कि प्रेम ही जीवन का केंद्र है। इस दुनिया में प्रेम ही एक ऐसी विषयवस्तु है जो दुनिया को एक साथ चलने को मजबूर कर सकती है।

Animesh Mishra said...

सच तो ये है कि प्रेम ही जीवन का केंद्र है। इस दुनिया में प्रेम ही एक ऐसी विषयवस्तु है जो दुनिया को एक साथ चलने को मजबूर कर सकती है।