Followers

Wednesday, 10 June 2015

ओ जाना

मन करता है एक दिन तुम्हारे साथ
इतनी सकरी गलियों से गुजरू
कि तुम खुद ही थाम लो मेरा हाथ
तुम्हे पहना दूँ लॉकेट का आधा हिस्सा
और आधा हिस्सा पहन लूँ अपने गले में
तुम्हारे हाथ में दे दू अपने नाम वाला कीरिंग


भर दूँ तुम्हारा वार्डरोब 

वैसी ही गुलाबी कमीज से
जो तुम्हें इतनी पसंद है 

कि तुम बार बार पहनती हो

मैं दिलाना चाहता हूँ तुम्हे 

मेले से वो कान की बालियां
जिसे पहनकर तुम खुद को ही आईने में
तिरछी निगाहों से देखकर शरमाती हो


तुम्हारे बिस्तर का तकिया, 

तुम्हारा सबसे पसंदीदा परफ्यूम
तुम्हारा पर्स, तुम्हारा काजल, तुम्हारा फ़ोन
तुम्हारे कमरे की दीवार पर टंगा 

तुम्हारी तश्वीरों वाला कोलाज

ये मत समझना जाना कि मैं तुम्हारी खुशियाँ खरीद रहा हूँ
दरअसल इस तरह मैं तुम्हारे सबसे करीब रहना चाहता हूँ


क्योंकि मैं जानता हूँ तुम नहीं रख सकती मुझे अपने सबसे करीब
अपने हाथों पर मेरे नाम का टैटू बनवाकर


( ओ जाना जब दिल से निकलोगी, तो कमरे का सामान भी खाली करना होगा)

-एकता

Ekta nahar - 

5 comments:

Digamber Naswa said...

प्रेम की इन्तहा तो यही है ... हर शै में वो हों बस ..
लाजवाब ख्वाब सी रचना ...

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, नहीं रहे रॉक गार्डन के जनक - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रश्मि शर्मा said...

बहुत प्‍यारे भावों से सजी कवि‍ता..अच्‍छी लगी

सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर रचना ।

Ekta Nahar said...

thank you all :)