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Tuesday, 16 June 2015

ख़त जलाने के बाद

कुछ सिमटी सिमटी सी रहती हूँ आजकल ...कभी गुम...कभी गुमशुम...अपने सामान में से तुमसे जुडी हर  चीज ढूंढ ढूंढ कर मिटा मिटा रही हूँ ...लैपटॉप से तुम्हारे फोटो, अलमारी से तुम्हारे तोहफे, और हाँ वो ख़त भी, जो तुमने मुझे पिछले वेलेंटाइन डे पर दिया था...

अच्छी तरह जानती हूँ, ख़त जलाने से यादें धुँआ नहीं होतीं अफसाने रख नहीं होते ...पर कुछ तो जलेगा ही ....शायद हमारे प्रेम का अस्तित्व और इसकी निशानियाँ भी ...और अब जलने के बाद कुछ भी बाकी  नहीं रहेगा क्योंकि इस बार आग की लपटें बहुत तेज़ हैं






2 comments:

Digamber Naswa said...

निशानियाँ जल जाने से यादें कहाँ मरती हैं ...

सु-मन (Suman Kapoor) said...

कुछ एहसास अमिट होते हैं ..मिटाने से नहीं मिटते और जलाने से नहीं जलते |