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Friday, 10 July 2015

'चरित्रहीन'



जब पहली बार तुमने मुझे
२० मिनट तक चूमा
और उस बेहतरीन 'फ्रेंच किस' के बाद
तुमने हंसकर कहा कि तुम तो
मुझसे भी अच्छी तरह किस करती हो
और मैंने यह सुनकर दी थी तुम्हें
एक तिरछी स्माइल
जैसे मैं तो बड़ी एक्सपर्ट रही हूँ
***
और फिर उस शाम जब मैंने कहा
कि मैं नहीं पीती शराब
तो तुमने कहा कि नाक बंद करो
और एक सिप में पी लो
किसी कड़वी दवाई की तरह
फिर भी मेरे न मानने पर
तुमने जिद-जिद में लगायी थी शर्त
कि कौन अपना पैग पहले ख़त्म करता है
फिर हारकर मैंने मान ली तुम्हारी बात
और मुझसे हारने पर तुमने हंसकर कहा
कि तुम तो लगती हो बड़ी दारूखोर
***
फिर वैलेंटाइन डे की उस रात
जब तुमने जिद की कि
आज यहीं रुक जाओ मेरे पास
और मैंने भी प्रेम में बेसुध
मान ली तुम्हारी बात
हालाँकि उसके पहले कई बार
मैं कर चुकी थी इंकार
***
और फिर जब हज़ार इंकार के बाद भी
तुम्हारी छटपटाहट को देखकर
मैंने लांघी थी वो 'पवित्रता' वाली रेखा
और आवारा होकर हमने किया था 'सेक्स'
उसके बाद अगली सुबह तुमने
मेरा माथा चूमकर कहा था
कि तुम्हारे जैसी कोई नहीं
***
पिछले हफ्ते 'ब्रेकअप' के बाद
जब मैं भिगो रही थी अपना तकिया
तब सुनने में आया कि हमारी ये अंतरंग बातें
अब हो चुकी हैं सरेआम
और तुमने साबित कर दिया है
इन सब बातों की बुनियाद पर मुझे
'चरित्रहीन'


-एकता नाहर 

4 comments:

Tushar Rastogi said...

आपकी इस पोस्ट को शनिवार, ११ जुलाई, २०१५ की बुलेटिन - "पहला प्यार - ज़िन्दगी में कितना ख़ास" में स्थान दिया गया है। कृपया बुलेटिन पर पधार कर अपनी टिप्पणी प्रदान करें। सादर....आभार और धन्यवाद। जय हो - मंगलमय हो - हर हर महादेव।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

पेड़ को प्यार का मिल रहा है सिला
मारते पत्थरों से निगोड़े बहुत। ...
......

आम मे आ गए जब टिकोरे बहुत ...

सुशील कुमार जोशी said...

नाखूँनो से माँस नोचने वालों को आता है
बिना खून बहाये काट कर कर लेना
टुकड़े टुकड़े और नाखून छुपाना भी ।

SKT said...

गहरे अहसासात...
टिपिकल मेल मेंटलिटी पर करारा व्यंग्य!