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Friday, 20 January 2017

एक और डायरी पेज-१


आज पूरे पांच दिन हो गए थे। उस खूबसूरत लड़की के चेहरे पर ब्लैक हेड्स और बालों में डेंड्रफ दिखने लगा था। कपड़े नहीं बदले थे उसने, ऑफिस से लेकर सोने तक वही जीन्स टॉप और जैकेट उसके बदन से चिपक गए थे। जो आइना दिन रात उसे घूरता था, उस आईने ने उसे पांच दिन से ठीक से देखा तक नहीं था। उसके घर की चादर पर सिलवट भी आ जाए तो वो मेहमानों के सामने ही बिस्तर ठीक करने लगती, आज उसके घर पर जगह जगह कपड़े, झूठे बर्तन और जूते बिखरे थे। उसके घर से अब तेज म्यूजिक की आवाज नहीं आती, बस एक ख़ामोशी-सी पसरी रहती है जैसे किसी ने उसकी चीख के मुँह को जोर से दबा दिया हो। मोबाइल उठाती तो उसे लगता जैसे उसने किसी और के मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट को कॉपी कर लिया हो, वह ढूंढती किसी थोड़ी ज्यादा पहचान वाले कांटेक्ट को, और डायल करते-करते रुक जाती। वह रजाई में मुँह ढँक लेती है और घंटों अपनी आँखों के सामने तमाम यादों को आता-जाता देखती। साथ ही उस हादसे, उस समय और उन लोगों से भी, जिनसे लड़ने का अब उसने फैसला किया है। वह फिर रजाई में मुँह ढंककर अपने मोबाइल में पिंक मूवी रीप्ले कर देती है और सोचती है कि नो का मतलब नो होता है, काश ये समझाना आसान होता।



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